शेल्टर कांड: मुजफ्फरपुर से मधुबनी शिफ्ट की गईं 14 बच्चियों में से एक गायब, अब तक कोई सुराग नहीं

<p style="text-align: justify;"><strong>पटना:</strong> मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के बाद से मधुबनी बालिका गृह भी लगातार चर्चा में है. दरअसल मुजफ्फरपुर बालिका गृह से 14 बच्चियों को मधुबनी बालिका गृह में शिफ्ट किया गया था, जिसमें से एक बच्ची 12 जुलाई से लापता है. मधुबनी टाउन थाना में बच्ची के लापता होने की प्राथमिकी दर्ज है. लेकिन अभी तक बच्ची का कोई सुराग नहीं मिल पाया है. पुलिस बार-बार दावा कर रही है कि बच्ची को ढ़ूंढ़ लिया जाएगा, लेकिन अभी तक कोई कामयाबी नहीं मिली है.</p> <p style="text-align: justify;">पुलिस का कहना है कि लापता बच्ची गूंगी है, इसलिए थोड़ी परेशानी हो रही है. उधर बच्ची के गायब होने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की सियासत भी जोरों पर है. लोकसभा में सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव, सांसद सुनीता रंजन सहित बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत विपक्ष के तमाम नेता लापता बच्ची को मुजफ्फरपुर कांड की मुख्य पीड़ित बताते हुए जानबूझकर गायब कर देने का आरोप लगा रहे हैं. साथ ही स्थानीय स्तर के तमाम संगठन और नेता भी इस मुद्दे पर मधुबनी बालिका गृह चलाने वाले परिहार सेवा संस्थान को घेरते हुए बालिका गृह की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं.</p> <p style="text-align: justify;">वहीं परिहार सेवा संस्थान की सचिव प्रज्ञा भारती का कहना है कि मधुबनी बालिका गृह पर लगाए जा रहे तमाम आरोप निराधार हैं, कुछ लोग निजी स्वार्थ के चलते परिहार सेवा संस्थान को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगा रहे हैं. प्रज्ञा भारती का कहना है कि मधुबनी बालिका गृह का मुजफ्फरपुर कांड से कोई लेना-देना नहीं है. दरभंगा में हमलोगों की तरफ से चलाए जा रहे बालिका गृह में बच्चियों को स्कूल भी भेजा जा रहा है, वे सामान्य जिंदगी जी रही हैं. परिहार सेवा संस्थान बच्चियों को स्कूल भी भेजना चाहता है, लेकिन तुच्छ राजनीति के चलते माहौल इतना खराब कर दिया गया है कि बच्चियां स्कूल नहीं जा पा रही हैं. मधुबनी बालिका गृह में बच्चियों को तमाम सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं.</p> <p style="text-align: justify;">स्थानीय लोगों ने इस मामले की शिकायत जिला पदाधिकरी एवं पुलिस अधीक्षक को किया जिसके बाद आनन फानन मे जांच भी हुआ लेकिन नतीजा जीरो रहा. कुछ दिनों पहले वहां चार महिला पुलिस की प्रतिनियुक्ति भी कर दी गयी हैं. मधुबनी बालिका गृह के संरक्षण का रोप जेडीयू के एक बड़े नेता पर लगता आया है.</p> <p style="text-align: justify;">बता दें कि मधुबनी से 2017 से 2018 तक छह बच्चियां गायब हो चुकी हैं. इसके अलावा दो बच्ची का मौत भी हो गई लेकिन ताज्जुब की बात है कि उन बच्चियों का पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी किसी पदाधिकारी को नहीं है. स्थानीय युवा ने बताया की रात होते ही बालिका गृह के अंदर गाडी जाती है और रात में ही निकल जाती है. वहीं स्थानीय लोग कैमरा को देखकर इतना घबरा गए कि कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया.</p> <p style="text-align: justify;">CWC के पूर्व सदस्य अमरेश श्रीवास्तव पहले ही संस्था के प्रति अपना शक जाहिर कर चुके हैं. अमरेश श्रीवास्तव ने बताया कि मुझ पर पहले भी आरोप लगाये गए लेकिन मैंने कभी इस तरह का कार्य नहीं किया जो जांच में सामने भी आ चुका है. मैं सभी आरोपो से मुक्त भी हो चुका हूं. पहला कि परिहार सेवा संस्थान द्वारा जे जे एक्ट का खुलेआम उल्लंघन किया जाता रहा है. दूसरा की उनके संस्था में परिवार के एक से ज्यादा लोग संस्थान में सदस्य के तौर पर जुड़े हुए हैं जो 21/1860 रजिस्ट्रेशन एक्ट के बिल्कुल विरुद्ध है. तीसरा कि उनके बालिका गृह में पुरुष कार्यरत रहे है जो जे जे एक्ट की धारा 26/4 का खुला उल्लंघन है.</p> <p style="text-align: justify;">बाल संरक्षण इकाई की तरफ से पूर्व से ही जिला पदाधिकारी, जिला जज, समाज कल्याण विभाग, माननीय उच्च न्यायालय, माननीय सर्वोच्च न्यायालय में गलत डाटा से बना रिपोर्ट भेजा जाता रहा है. जिसकी शिकायत पहले से ही कई बार की जाती रही है लेकिन सहायक निदेशक एवं बाल संरक्षण पदाधिकारी के संरक्षण से बालिका गृह खुलेआम कानून की धता बताकर अपने हिसाब से बालिका गृह का संचालन करती आ रही है. मधुबनी से गायब होने वाली बच्चियों में मुजफ्फरपुर की कथित गूंगी बच्ची भी गायब है जिसके ब्रजेश ठाकुर का मुख्य राजदार बताया जा रहा है. बालिका गृह के संचालिका का पति मामले को दवाने का भरपूर प्रयत्न कर रहे है इसके लिए वे स्थानीय लोगो को धमकाने के अलावे दो समाजसेवियों पर पुलिस में शिकायत भी दर्ज करा चुके है.</p> <p style="text-align: justify;">पहले से ही शक के दायरे में चल रहे मधुबनी के बालिका गृह का मामला अब तूल पकड़ने लगा है. लोग डरते हुए ही सही लेकिन अब आवाज उठाने लगे है और संस्था के अंदर होने वाले अनैतिक कार्यो का विरोध करने लगे है. फिलहाल जांच के नाम पर कोई मधुबनी के पूर्व बाल संरक्षण पदाधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है और बाल संरक्षण पदाधिकारी ने डॉ रश्मि वर्मा ने पदभार ग्रहण कर लिया है.</p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टर रश्मि बर्मा (ADCP) उप निदेशक बाल संरक्षण सह उप निदेशक सामाजिक सुरक्षा का पद भार सोमवार को ग्रहण कर लिया. पदभार ग्रहण करने के बाद नई रश्मि वर्मा ने बताया की हम टाटा इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट को पढ़ रहें हैं. बालिका गृह की लड़कियों की सुरक्षा और इंतजाम को लेकर सरकार के निर्देशों का पालन हमारी प्राथमिकता है. पहले के एडीसीपी कुमार सत्यकाम को सरकार ने TISS की रिपोर्ट को दबाकर रखने के आरोप में निलंबित कर दिया है. साथ ही निलंबन की अवधि तक उनका मुख्याल दरभंगा बनाया है.</p> <p style="text-align: justify;">वहीं मधुबनी की सदर डीएसपी कामिनी बाला ने भी बालिका गृह का दौरा किया है. उन्होंने बताया कि हम मामले की जांच हर पहलू से कर रहें हैं. वहीं मधुबनी के डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि अभी इसकी जांच चल रही है इसलिए हम ज्यादा कुछ नहीं बता सकते हैं. लेकिन बालिका गृह से गायब लड़की की खोज हम कर रहे हैं.</p>

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शेल्टर कांड: मुजफ्फरपुर से मधुबनी शिफ्ट की गईं 14 बच्चियों में से एक गायब, अब तक कोई सुराग नहीं शेल्टर कांड: मुजफ्फरपुर से मधुबनी शिफ्ट की गईं 14 बच्चियों में से एक गायब, अब तक कोई सुराग नहीं Reviewed by Unknown on August 07, 2018 Rating: 5

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