<div class="_1xdm"> <div class="_4tdt _ua1"> <div class="_ua2"> <div class="_4tdv"> <div class="_5wd4 _1nc7"> <div class="._1dlq _h8t"> <div class="_5wd9 direction_ltr clearfix"> <div class="_1e-x _n4o"> <div class="_3_bl"> <div class="_5w1r _3_om _5wdf"> <div class="_4gx_"> <div class="_1aa6"><span class="_5yl5"><strong>नई दिल्ली:</strong> जब अंतिम यात्रा देश के मौजूदा सबसे लोकप्रिय नेता की हो और प्रधानमंत्री जैसे पद को एक, दो बार नहीं, बल्कि तीन-तीन बार सुशोभित किया हो, जिसके चाहने वालों में विचारधारा के बंधन को तोड़ने वाले हों... ओजस्वी वक्ता रहा हो, दिल से कवि, पेशे से पत्रकार और स्वभाव से समाजसेवी रहा हो... अब जब उसकी अंतिम यात्रा होगी, आम आदमी तो आदमी, खास भी उस यात्रा में शामिल होने पर खुद को गौरान्वित समझेंगे. ऐसे में</span><span class="_5yl5"> खुद का रोकना उनके लिए एक मुश्किल काम होगा... और यही वजह है कि अतीत के बड़े-बड़े इतिहास और घटनाओं को अपने कलेजे में समेटे दिल्ली में आज एक नया इतिहास दर्ज हुआ... देश का मौजूदा प्रधानमंत्री सुरक्षा की तमाम बेड़ियों को दरकिनार करते हुए अपने गुरू, अभिभावक और लोकप्रिय जननेता की अंतिम यात्रा में पैदल ही चल पड़े. इस सफर में उनके साथ पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और आम जनता का हुजूम है.<a href="https://static.abplive.in/wp-content/uploads/sites/2/2018/08/17090711/modi.jpg"><img class="alignnone size-full wp-image-941560" src="https://ift.tt/2OFDYjU" alt="" width="716" height="470" /></a></span></div> </div> </div> </div> </div> </div> </div> </div> </div> </div> </div> </div> <div class="_1aa6"></div> <div class="_1aa6">अटल बिहारी वाजपेयी की ये अंतिम यात्रा दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग से राजघाट तक जाएगी जिसकी कुल दूरी तकरीबन 3 किलोमीटर है. अटल बिहारी वाजपेयी के पार्थिव शरीर को बीजेपी मुख्यालय से स्मृति स्थल ले जाया जा रहा है. जहां करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अटल बिहारी का स्मृति स्थल यमुना किनारे बनाया जाएगा.</div> <div class="_1xdm"> <div class="_1aa6"></div> <div class="_1aa6"><strong>कैसे थे अटल संग मोदी के रिश्ते</strong></div> </div> अटल बिहारी वाजपेयी ने न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी थी बल्कि देश को एक अगली पीढ़ी के नेता भी तैयार कर के दिए थे. वो अटल ही थे जिन्होंने नरेंद्र मोदी पर विश्वास जताते हुए उन्हें गुजरात प्रदेश की अहम जिम्मेदारी सौंपी थी. 1995 में बीजेपी ने गुजरात में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी और उस दौरान वहां केशुभाई पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया था. लेकिन साल 2001 में गुजरात में आए जोरदार भूकंप से वहां की राजनीति भी हिल गई थी. भूकंप पीड़ित गुजरात के जख्मों पर मरहम लगाने के लिए उस दौर में अटल ने मोदी को चुना. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. <code><iframe class="vidfyVideo" style="border: 0px;" src="https://ift.tt/2Piv8tl" width="631" height="381" scrolling="no"></iframe></code>
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इतिहास में पहली बार: अंतिम यात्रा के काफिले के साथ पैदल चल रहे PM मोदी, देखें VIDEO
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August 17, 2018
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