<p style="text-align: justify;"><strong>चेन्नई:</strong> पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके डीएमके प्रमुख एम करुड़ानिधि पार्थिव शरीर को मरीना बीच पर ही उनके राजनीति गुरु अन्नादुरै के समाधि के पास ही दफनाया जाएगा. समाधि स्थल को लेकर कल से चल रहे विवाद पर मद्रास हाईकोर्ट आज फैसला सुनाया. फैसले की खबर सुनते ही करुणानिधि के परिवार के लोग और उनके समर्थक फूट फूट कर रोए. करुणानिधि के बेटे एमके स्टालिन, अलागिरी, कनिमोझी तीनों की आंखों में आंसूं भर आए. राजाजी हॉल के बाहर समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी भी की.</p> <code></code> <blockquote class="twitter-tweet" data-lang="en"> <p dir="ltr" lang="en">Tamil Nadu: DMK supporters celebrate following Madras High Court's verdict to allow the burial of former CM M <a href="https://twitter.com/hashtag/Karunanidhi?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw">#Karunanidhi</a> at Chennai's Marina beach. Visuals from Rajaji Hall (pic 1 & 3) and outside Madras High Court (pic 2) <a href="https://t.co/nlB8KS5Iaf">pic.twitter.com/nlB8KS5Iaf</a></p> — ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1027065610683838465?ref_src=twsrc%5Etfw">August 8, 2018</a></blockquote> <p style="text-align: justify;">कोर्ट में ये मामला इसलिए पहुंचा है क्योंकि करुणानिधि समर्थक चाहते हैं कि उनकी समाधि मरीना बीच पर बनाई जाए लेकिन राज्य सरकार ने मरीना बीच पर जगह देने से इंकार कर दिया है. मंगलवार शाम 6 बजकर 10 मिनट पर करुणानिधि ने चेन्नई में अंतिम सांसें लीं. उनका इलाज कावेरी अस्पताल में चल रहा था और अस्पताल के मैनेजमेंट में देर शाम उनके देहांत की जानकारी दी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सुनवाई के दौरान डीएमके ने क्या दलील दी</strong> हाईकोर्ट में डीएमके के वकील ने दलील रखते हुए कहा, ''एम जी रामचंद्रन को अन्नादूरई की समाधि के पास जगह दी गयी क्योंकि वो उनकी आइडियोलॉजी को फॉलो करते थे. जयललिता को जगह मिली क्योंकि वो एमजीआर को फॉलो करती थी. करुणानिधि भी अन्नादुराई को फॉलो करते थे तो उनको जगह क्यों नहीं?''</p> <p style="text-align: justify;">डीएमके के वकील ने कहा, ''आर्टिकल 21 का पालन करते हुए जगह देनी चाहिए. हम वहां बिल्डिंग बनाने की मांग नहीं कर रहे बस समाधि बनाने की मांग कर रहे हैं. केंद्र के आदेश में नही कहा गया कि पूर्व सीएम को वहां जगह नहीं दी जा सकती, तो भला किस बात पर आपत्ति है?''</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सुनवाई के दौरान सराकरी पक्ष ने क्या कहा?</strong> सरकारी वकील ने कहा, ''1975 में के कामराज को भी मरीना बीच पर पर जगह नहीं दी गयी और वो आदेश खुद करुणानिधि ने ही जारी किया था ये कहते हुए कि वो सीएम नहीं थे. 1996 में जानकी रामचंद्रन पूर्व सीएम को भी मरीना बीच पर जगह नहीं दी गयी और वो आदेश खुद करुणानिधि ने ही जारी किया था. इसको पैरिटी( समानता) के आधार पर देखना चाहिए. सीएम ने पूछा था कि इससे पहले के मामलों में क्या किया गया था, उसी को ध्यान में रखकर ये फैसला लिया गया.''</p> <p style="text-align: justify;">सराकरी वकील ने कहा, ''कोई पद पर होता है और कोई पद पर रह चुका होता है सबके लिए अलग अलग प्रोटोकॉल होता है. इस मामले में हम परंपरा का पालन कर रहे हैं वो परंपरा जो खुद करुणानिधि ने तय की. उनके कार्यकाल के दौरान 3 पूर्व सीएम की मृत्यु हुई थी लेकिन उन्हें मरीना बीच पर जगह नहीं मिली.''</p> <p style="text-align: justify;">सरकारी वकील ने कहा, ''ऐसा नहीं है कि हम उनका अपमान कर रहे हैं हम तो उनकी बातों और आदेशों का पालन कर रहे हैं. उल्टा याचिकाकर्ता ही करुणानिधि का अपमान कर रहे हैं जो वो उनके पहले के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं. याचिकाकर्ता ने प्रेस रिलीज़ को चुनौती दी है न कि किसी सरकार के आदेश को.''</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मरीना बीच की ही मांग क्यों हो रही थी?</strong> चेन्नई की मरीना बीच महज एक बीच नहीं है बल्कि दक्षिण में द्रविड़ की राजनीति में इस जगह का खास महत्व है. ये बीच दिग्गज द्रविड़ राजनेताओं की समाधि के लिए जानी जाती है. मरीना बीच वो जगह है जो द्रविड़ राजनीति का इतिहास बयां करती है. इस जगह पर द्रविड़ राजनीति के तीन सबसे बड़े नेताओं की समाधि है.</p> <p style="text-align: justify;">द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के संस्थापक सीएन अन्नादुरै की समाधि भी मरीना बीच ही है. अन्नादुरै के बाद दक्षिण के बड़े नेता एमजीआर को मरीना बीच पर जगह दी गई और हाल ही के दिनों में एमजीआर की राजनीतिक धरोहर संभालने वाली जे. जयललिता को मरीना बीच पर समाधि दी गई. ऐसे में भारतीय राजनीति को 61 साल देने वाले एम करुणानिधि के लिए भी उनके समर्थक मरीना बीच पर समाधि की मांग कर रहे हैं.</p> <p style="text-align: justify;">हालांकि ये जानना बेहद जरूरी है कि द्रविड़ आंदोलन के जनक पेरियार की समाधि मरीना बीच पर नहीं बनाई गई. चेन्नई के दूसरे इलाके को पेरियार के लिए चुना गया जो आज 'पेरियार थिडाल' के नाम से जाना जाता है.</p> <code><iframe class="vidfyVideo" style="border: 0px;" src="https://ift.tt/2OUdOuO" width="631" height="381" scrolling="no"></iframe></code>
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मरीना बीच पर ही बनेगी करुणानिधि की समाधि, फैसला सुन फूट-फूटकर रोया परिवार
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August 08, 2018
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