यूपी में अपर निजी सचिव की भर्तियों पर जांच की आंच तेज, बीजेपी एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने सीएम योगी को लिखा पत्र
<p style="text-align: justify;"><strong>गोरखपुर</strong>: बीजेपी एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने लोकसेवा आयोग के अपर निजी सचिव के पद पर भर्ती में हुए भ्रष्टाचार की जांच और नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी करने की मांग की है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में सीबीआई के 19 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को जांच के लिए लिखे गए पत्र का हवाला दिया है. उन्होंने अधिकारियों पर हीलाहवाली का आरोप भी लगाया है. मायावती के शासन काल में साल 2010 में लोकसेवा आयोग के अपर निजी सचिव (उप्र सचिवालय) के 250 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था. इसका पहले और दूसरे चरण का परिणाम 2015 और अंतिम चरण का परिणाम 2017 में जारी किया गया था. <strong>देवेन्द्र प्रताप सिंह ने योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर की जांच की मांग</strong> देवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि 4 जुलाई को उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अधिसूचना जारी करने की मांग की है. उन्होंने बताया कि मायावती के शासनकाल में लोक सेवा आयोग के अपर निजी सचिव (उप्र सचिवालय) चयन-2010 विज्ञापन निकाला गया था. इसका पहले और दूसरे चरण का परिणाम 2015 और अंतिम चरण का परिणाम 2017 में निकाला गया. इस भर्ती में सीबीआई से पूर्व में बीजेपी एमएलसी ने जांच की मांग की थी. सीबीआई ने इसमें जबरदस्त भ्रष्टाचार का साक्ष्य जुटाने के बाद नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी करने के लिए मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन को 19 जून को पत्र लिखा है.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://abpnews.abplive.in/uttar-pradesh/allahabad-gets-trauma-center-facility-before-kumbh-2019-907453">कुंभ से पहले इलाहाबाद को मिली ट्रॉमा सेंटर की सौगात, हाईटेक सुविधाओं से है लैस</a></p> <p style="text-align: justify;"><strong>बीजेपी एमएलसी ने कहा- सीबीआई ने बड़े पैमाने पर घपले पकड़े हैं</strong> उन्होंने बताया कि इसमें सीबीआई ने बड़े पैमाने पर घपले पकड़े हैं. लेकिन, प्रॉपर नोटिफिकेशन की आवश्यकता होती है. सरकार ने जो जांच का आदेश/नोटिफिकेशन जारी किया है, वो अनिल यादव का है. विज्ञापन मायावती के शासनकाल का है. इसके लिए अलग नोटिफिकेशन जारी करना होगा. उन्होंने बताया कि सीबीआई ने साक्ष्य एकत्र कर लिया है. नोटिफिकेशन नहीं जारी होगा, तो कोई भी इसको चैलेंज कर सकता है. इसके लिए सीबीआई ने 19 जून को मुख्य सचिव को पत्र लिखा है. मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव गृह को पत्र लिखा है. अब वो फाइल अपर मुख्य सचिव, सचिवालय प्रशासन को चली गई है. अभी तक नोटिफिकेशन जारी नहीं हो पाया है.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://static.abplive.in/wp-content/uploads/sites/2/2018/07/08094155/Devendra-P-Singh-Latter.jpg"><img class="alignnone wp-image-907503 size-large" src="https://ift.tt/2udcqJV" alt="" width="730" height="1024" /></a></p> <p style="text-align: justify;"><strong>250 पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था</strong></p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने बताया कि 250 पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में उन्होंने बताया है कि ‘मेरे संज्ञान में लाया गया है कि सीबीआई ने लोक सेवा आयोग के अपर निजी सचिव (उप्र सचिवालय) चयन-2010 में जबरदस्त भ्रष्टाचार का साक्ष्य पाया है. सीबीआई इस भर्ती की जांच कराना चाहती है.’ पत्र में आगे उन्होंने लिखा है कि ‘ज्ञात हो कि इसके प्रथम और द्वितीय चरण का परिणाम 2015 में घोषित किया गया. अंतिम परिणाम 2017 में घोषित किया गया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सीबीआई ने इसकी जांच के लिए उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखा था</strong> गंभीर अनियमितता का साक्ष्य मिलने के कारण सीबीआई ने इसकी जांच के लिए मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को 19 जून 2018 को पत्र लिखा है. लेकिन अधिकारी जांच का आदेश नहीं दे रहे हैं.’ आगे उन्होंने अनुरोध करते हुए लिखा है कि सीबीआई की संस्तुति को दृष्टिगत रखते हुए अपर निजी सचिव (उप्र सचिवालय) चयन-2010 की सीबीआई जांच का नोटिफिकेशन (अधिसूचना) निर्गत करने के त्वरित आदेश प्रदान करने की कृपा करें.’ बीजेपी एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने लेटर पैड पर बाकायदा तारीख और नीचे अपने हस्ताक्षर के साथ ये पत्र मुख्यमंत्री को भेजा है. <strong>बीजेपी एमएलसी ने अखिलेश यादव के शासनकाल में पीसीएस भर्ती में घोटाले का आरोप लगाया था</strong> ये मामला तब संज्ञान में आया था, जब बीजेपी एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव के शासनकाल में 2012 में यूपी पीसीएस भर्ती में घोटाले का आरोप लगाया था. उस मामले में सीबीआई जांच कर रही थी. उसी दौरान ये मामला भी संज्ञान में आ गया. सीबीआई ने इस मामले में भी पर्याप्त सुबूत जुटा लिए हैं. देवेन्द्र प्रताप सिंह ने पिछले साल अप्रैल माह के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्होंने अखिलेश यादव के शासनकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से पीसीएस भर्ती परीक्षा में जाति विशेष के लोगों को नियमों के विरुद्ध भर्ती कर घोटाले की बात कहीं थी. उस मामले में भी अधिसूचना जारी हो चुकी है और जांच काफी आगे बढ़ चुकी है.</p> <p style="text-align: justify;"> <a href="https://abpnews.abplive.in/uttar-pradesh/bjp-fully-prepared-for-2019-elections-pm-narendra-modis-breakthrough-rallies-in-uttar-pradesh-907469">यूपी में पीएम मोदी की ताबड़तोड़ रैलियां, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की नींव रखने के साथ कर सकते हैं कई बड़े एलान</a></p> <p style="text-align: justify;"><strong>एसपी सरकार में 86 में 54 पदों पर जाति विशेष को भर्ती करने का आरोप</strong> उस समय उन्होंने पीसीएस भर्ती में घोटाले के साथ भ्रष्टाचार की बू आने की शिकायत भी की थी. उन्होंने पत्रक में पूर्ववर्ती सपा सरकार द्वारा न्यू आगरा थाने के मजारिया हिस्ट्रीशीटर अनिल यादव को लाभ पहुंचाकर लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष बनाने की भी शिकायत की थी. उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि एसपी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग भर्ती में घोटाला किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने घोटाले के जांच की मांग भी की थी. उस समय उन्होंने आरोप लगाया था कि 86 में 54 पदों पर जाति विशेष जो एसपी सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जाति से संबंधित है उन्हें भर्ती कर दिया गया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>देवेन्द्र प्रताप सिंह इसकी शिकायत प्रधानमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से भी की थी</strong> उन्होंने आरोप लगाया था कि लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश परीक्षा 2012 के साक्षात्कार में 200 नंबर के इंटरव्यू में जाति विशेष के अभ्यर्थियों को 135 से 140 नंबर, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को 100 और अल्पसंख्यक और दलित अभ्यर्थियों को 80-80 नंबर दिए जाते थे. 239 जातियां अन्य पिछड़े वर्ग की सूची में सूचीबद्ध है. जबकि 238 का कोटा अकेले अखिलेश यादव अपने कुनबे को दिला रहे थे. प्रतिभाशाली नौजवान कुंठित और हताश था. उन्होंने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति से भी की थी.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://abpnews.abplive.in/uttar-pradesh/rivolver-bullets-found-in-mans-bag-at-gorakhpur-airport-907479">गोरखपुरः युवक के लिए परेशानी का सबब बन गई बेटे की एक गलती, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पुलिस के हवाले किया</a></p> <p style="text-align: justify;"><strong>इसमें शामिल अधिकारियों के जांच की आंच से बच पाना मुश्किल होगा</strong> पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान उन्होंने मांग की थी कि लोक सेवा आयोग सहित सभी भर्ती आयोग के अध्यक्ष भ्रष्टाचार में डूबे हैं और नैतिकता के आधार पर उन्हें अपने पद से हट जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि वे ऐसा नहीं करते हैं तो विधिसम्मत कार्रवाई करके उन्हें हटा देना राज्य के हित में होगा. अब लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश के अपर निजी सचिव (उप्र सचिवालय) के पद पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के सुबूत मिलने के बाद इसमें शामिल अधिकारियों के जांच की आंच से बच पाना मुश्किल होगा.</p> <p style="text-align: justify;">योगीराज में भी बीजेपी के मंत्री, जनप्रतिनिधियों और नेताओं को अधिकारियों की कार्यप्रणाली रास नहीं आ रही है. यही वजह है कि सीबीआई के पत्र के बावजूद अधिकारियों की ओर से हीलाहवाली के कारण ही उन्हें मुख्यमंत्री को बाकायदा पत्र लिख कर जांच के लिए आदेश देने के अनुरोध करना पड़ा.</p>
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यूपी में अपर निजी सचिव की भर्तियों पर जांच की आंच तेज, बीजेपी एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने सीएम योगी को लिखा पत्र
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July 08, 2018
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