कश्मीर: कभी मिलिटेंट बनने के लिए थामा था पाक का दामन, अब इस गाने के साथ मीर बने हरदिल अजीज

<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> 1990 में कश्मीर के अल्ताफ अहमद मीर ने जब पाकिस्तान का रुख किया था तब वो मिलिटेंट बनना चाहते थे. उस वक्त अनंतनाग के मीर की उम्र महज़ 22 साल थी. तीन दशक बाद अब भी उन्हें भारत लौटने का इंतज़ार है और ऐसा होता दिखाई नहीं देता. लेकिन इस बीच उनका एक गाना कश्मीर समेत बाकी के भारत में काफी पसंद किया जा रहा है. गाने के बोल कुछ इस तरह हैं- 'ऐ फूल मेरे यार को तूने नहीं देखा, ऐ बुलबुलो मेरे दिलदार को ज़रा ढूंढ़ लो.'</p> <p style="text-align: justify;">दिग्गज शायर गुलमा अहमद मंज़र का 'हा गुला' नाम का एक गाना है. ये पहला कश्मीरी गाना है जिसने कोक स्टूडियो में अपनी जगह बनाई है. दरअसल, कोक स्टूडियो ने पाकिस्तान में अपने नए वेंचर की शुरुआत की है जिसका नाम कोक स्टूडियो एक्सप्लोरर है. ये गाना वहीं प्रोड्यूस किया गया है. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में प्रोड्यूस किए गए इस गाने को पहले दो दिनों में यूट्यूब पर दो लाख से ज़्यादा लाइक्स मिले हैं.</p> <p style="text-align: justify;">उनके भाई का कहना है कि बचपन से ही मीर का झुकाव संगीत की तरफ था. मीर के परिवार के लिए उन्हें अचानक से मिली ये प्रसिद्धी एक उम्मीद जगाने वाली बात है. इस बात की उम्मीद कि शायद इसके बाद उनका भारत लौटना मुमकिन हो पाए. उनके परिवार का कहना है उन्हें लंबे समय से ऐसी उम्मीद थी कि काश मीर वापस लौट आएं लेकिन हालात ऐसे नहीं थे. परिवार के लिए मीर को ऐसी प्रसिद्धी मिलना उनके घर लौटने जैसा है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>देखें गाने का वीडियो</strong></p> https://youtu.be/EnChosxHmUw <code></code>

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कश्मीर: कभी मिलिटेंट बनने के लिए थामा था पाक का दामन, अब इस गाने के साथ मीर बने हरदिल अजीज कश्मीर: कभी मिलिटेंट बनने के लिए थामा था पाक का दामन, अब इस गाने के साथ मीर बने हरदिल अजीज Reviewed by Unknown on July 16, 2018 Rating: 5

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