<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> दिल्ली के नवनिर्मित डा. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भव्य भवन में बीजेपी की दो दिन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का आज दूसरा और आखिरी दिन है. यहां जारी बैठक में चार राज्यों और 2019 के लोकसभा चुनाव पर रणनीतिक चर्चा चल रही है जिसका समापन प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद होना है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बीजेपी का लक्ष्य-असम्भव</strong> बैठक में 2019 के चुनाव को लेकर एक राजनैतिक प्रस्ताव भी पास हुआ है. प्रस्ताव में 2022 तक एक नया भारत बनाने का संकल्प प्रस्तुत किया गया. कहा गया कि जातिवाद, नक्सलवाद , आतंकवाद और संप्रदायवाद से मुक्त भारत का निर्माण 2022 तक हो जाएगा. भले ही बीजेपी ने अपने लिए एक असम्भव डेडलाइन तय की हो लेकिन इसे वोट लाइन के रूप में देखें तो ये भी बीजेपी की उस अब तक की कारगर राजनीति का ही बढ़ाव है जिसे सपने बेंचने की राजनीति कहा जाता है.</p> <div id="tw-target-text-container" class="gsrt tw-nfl tw-ta-container"> <pre id="tw-target-text" class="tw-data-text tw-ta tw-text-medium" dir="ltr" data-placeholder="Translation" data-fulltext=""></pre> </div> <p style="text-align: justify;"><strong>क्यों सवर्णों की नाराजगी के आगे नहीं झुकती बीजेपी</strong> पिछली छह तारीख को ही सवर्णों के भारत बंद का चार चुनावी राज्यों में बड़ा असर देखा गया था. सवर्ण इस बात से नाराज हैं कि बीजेपी दलितों के आगे झुक गई और उसने कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून में बदलाव कर दिया. इस संदर्भ में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यूपी के एक बड़े बीजेपी नेता ने अनौपचारिक बातचीत में बीजेपी के भीतर चल रही कुछ मन की बातों का भी खुलासा किया.</p> <p style="text-align: justify;">जब उनसे पूछा गया कि क्या सवर्णो की नाराजगी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को महंगी नहीं पड़ेगी? तो बीजेपी नेता ने कहा कि दलित और पिछड़ा वर्ग अत्याचार निवारण एक्ट के पीछे डट कर खड़े हो कर बीजेपी ने कोई राजनीतिक चूक नहीं की है न ही कोई आफत मोल ली है. इसके खिलाफ सवर्ण नाराजगी से बीजेपी को नुकसान इसलिए नहीं होगा क्योंकि सवर्ण नाराजगी को कोई नेतृत्व नहीं मिलेगा. कोई भी पार्टी इसके सपोर्ट में आने की हिम्मत नहीं करेगी. जबकि दलित नाराजगी तो आंदोलन बन सकती थी. इसलिए दलित नाराजगी का बड़ा खामियाज़ा बीजेपी को उठाना पड़ जाता. आखिर बीजेपी ये कैसे भूल सकती है कि दलितों और पिछड़ों के वोट के बिना 2014 का चुनाव किसी हाल में नहीं जीता जा सकता था. इस बात के जवाब में कि क्या बीजेपी इस बात का फायदा उठा रही है कि सवर्ण जातियों के पास बीजेपी के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है? यूपी के स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि ऐसा कहना विनम्रता के खिलाफ होगा.</p>
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क्यों सवर्णों की नाराजगी अफोर्डेबल है बीजेपी के लिए?
Reviewed by Unknown
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September 09, 2018
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